मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली। भारत की शानदार 7.8 प्रतिशत की पहली तिमाही जीडीपी ग्रोथ के बावजूद बाजार वैश्विक दबाव से उबर नहीं पाया। बीएसई सेंसेक्स 95.14 अंक यानी 0.12 प्रतिशत गिरकर 76,862.13 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 21.35 अंक यानी 0.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,059.05 के स्तर पर आ टिका। जीडीपी के अच्छे आंकड़े, फिर भी बाजार सुस्त क्यों? जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि 7.8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ भरोसा देने वाली है और वित्त वर्ष 2027 में भारत की करीब 7 प्रतिशत ग्रोथ की राह पर बने रहने की उम्मीद है। सेवा क्षेत्र और सेकेंडरी सेक्टर क्रमशः 10 प्रतिशत और 8.5 प्रतिशत की दर से बढ़े हैं, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखाता है। लेकिन उनका यह भी कहना था कि बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स निकट भविष्य में बाजार पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। कच्चा तेल और अमेरिकी यील्ड बने बड़ी चिंता ब्रेंट क्रूड 0.73 प्रतिशत चढ़कर 91.15 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 1.03 प्रतिशत की तेजी के साथ 86.64 डॉलर पर कारोबार करता दिखा। तेल आयात पर निर्भर भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए यह तेजी चिंता का विषय बनी हुई है। इसके अलावा अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.77 प्रतिशत और 30-वर्षीय यील्ड 5.24 प्रतिशत पर बनी रही, जिससे निवेशकों का रुझान सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स की ओर बढ़ सकता है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली पिछले दो कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने नकद बाजार में करीब 13,025 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जिसने घरेलू बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया। एशियाई बाजारों का हाल एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा। हॉन्गकॉन्ग का हैंग सेंग 1.11 प्रतिशत गिरकर 25,284 पर आ गया, जबकि सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.71 प्रतिशत टूटकर 5,714.59 पर रहा। जापान का निक्केई 225 भी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 66,170 पर बंद हुआ। हालांकि ताइवान वेटेड इंडेक्स 1.50 प्रतिशत की मजबूती के साथ 46,821.31 पर पहुंचकर अपवाद बना रहा। जकार्ता 0.86 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। आगे क्या? तकनीकी नजरिया एक्सिस डायरेक्ट के हेड ऑफ रिसर्च राजेश पाल्विया के मुताबिक, निफ्टी फिलहाल 24,200 के नीचे कारोबार कर रहा है और निकट भविष्य में सतर्कता बनी रह सकती है। उनके अनुसार तत्काल सपोर्ट 23,900 पर है, उसके बाद 23,800 का स्तर अहम रहेगा। अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार को रिकवरी की राह मिल सकती है। निवेशकों के लिए क्या मायने? घरेलू मोर्चे पर मजबूत आर्थिक ग्रोथ बाजार को सहारा दे रही है, लेकिन कच्चा तेल, अमेरिकी यील्ड्स और विदेशी बिकवाली जैसे वैश्विक कारक फिलहाल हावी हैं। ऐसे में निवेशकों को अगले कुछ सत्रों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें। आपकी राय जरूरी है: क्या आपको लगता है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले हफ्तों में निफ्टी को 24,000 के नीचे धकेल सकती हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।